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बाजरा की उन्नत खेती

Hima Shankar K R
(Agri Expert), Jul 03 , 2020 09:50:20AMArticle by expert

भूमि: बलुई दोमट अथवा ऐसी भूमि जहां जल निकास की अच्छी व्यवस्था हो, ज्वार की खेती के लिए उपयुक्त होती हैं।

खेती की तैयारी :

खेत में हल या ट्रेक्टर कल्टीवेटर से दो या तीन बार जुताई करें, जैविक खाद जैसे गोबर की खाद, आदि उपलब्ध हों तो 10 टन/हैक्टर की दर से बुआई के 15-20 दिनों पूर्व खेत में समान रूप से छिड़ककर भूमि में अच्छी तरह मिला देना चाहिए। जैविक खाद के प्रयोग से मृदा की भौतिक दशा में सुधार होता है तथा भूमि की जलधारण क्षमता भी बढ़ती है।

कृषि जलवायु प्रखण्ड के अनुसार प्रजातियाँ :

देशी: मैनपुरी।

सकर: पूसा-332, पूसा-23, आई.सी.एम.एच.-451

संकुल : आई.सी.एम.वी.-155, डब्ल्यू सी.सी.-75, आई.सी.टी.पी.-8203, राज-171

 

बीज की दर: 4-5 किग्रा. बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त है।

बीजोपचार : बाजरे के बीज को बोने से पहले 20 प्रतिशत नमक के घोल में डुबोकर द्वारा अरगट के दानों को निकाल कर 2-3 बार साफ पानी में धोकर थीरम 2.5 ग्राम प्रति किग्रा.बीज की दर से शोधित कर लेना चाहिए।

पि.एस.बी  जैवि उर्वरक @ 250 मिली. को आवश्कतानुसार पानी में घोल कर बीज की देर पर डाले , हाथ से मिलाएं और  छाया में सुखाकर बुआई करें।

बुवाई का समय :

देशी : जुलाई के मध्य में बोना चाहिए।

संकर : जुलाई के अन्तिम सप्ताह में बोना चाहिए।

 

दूरी : देशी प्रजातियों के लिए पंक्ति से पंक्ति एवं पौधे से पौधे की दूरी 30 x 15 सेमी. तथा संकर जातियों के लिए 30 X 10 सेमी. होनी चाहिए।

उर्वरकों का प्रयोग : सामान्यतया मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयो करना चाहिए। 10 से 12 टन कम्पोस्ट की खाद डालना भी आवश्यक है। बाजरे की खेती के लिए संकर प्रजातियों हेतु 100 किग्रा. नत्रजन, 50 किग्रा. फास्फेट तथा 25 किग्रा. पोटाश की आवश्यकता होती है, जिसके लिए एन.पी.के. 12:32:16 देशी प्रजातियों में 80 किग्रा. तथा संकर जातियों में 156 किग्रा., देशी प्रजातियों में 28 किग्रा. एवं संकर प्रजातियों में 50 किग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति हेक्टेयर बुवाई से पहले प्रयोग कर लें तथा यूरिया देशी प्रजातियों में 90 किग्रा. और संकर प्रजातियों में 178 किग्रा. प्रति हेक्टेयर खड़ी फसल में आवश्यकतानुसार दो या तीन बार प्रयोग करें।

 

फसल सुरक्षा

(अ) खरपतवार नियंत्रण :

  • 20 दिन बाद एक निराई करके रिक्त स्थानों की भराई कर लेनी चाहिए तथा
  • खरपतवारों को एट्राजीन @ 1.25 कि.ग्रा. को 400-500 ली. पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई के तुरन्त बाद 2 दिनों के अन्दर छिड़काव करें।

(ब) रोग नियंत्रण:

रोग

लक्षण

रोकथाम

कण्डुआ

 

यह फफूंदी जनित रोग है। बालियों में दाना बनते समय रोग के लक्षण दिखाई देते हैं। रोग ग्रसित दाने बड़े, गोल या अण्डाकार हरे रंग के दिखाई देते है बाद में दानों के अन्दर काला चूर्ण भरा होता हैं।

 

1. बीज शोधित करके बोना चाहिए।

2. एक ही खेत में प्रति वर्ष बाजरा की खेती नहीं करनी चाहिए।

3. रोग ग्रसित बालियों को निकालकर नष्ट कर देना चाहिए।

4. रोग की संभावना दिखते ही फफूंदी नाशक जैसे यमातो (कार्बेन्डाजिम 50WP)  की 1.0 किग्रा. मात्रा को 800-1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से 8-10 दिन के अन्तराल पर 2-3 छिड़काव करना चाहिए।

 

मृदुरोमिल आसिता व हरित बाल रोग

रोग से प्रभावित पौधों की पत्तियों पीली पड़ जाती है तथा निचली सतह पर फफूंद की हल्के भूरे रंग की वृद्धि दिखाई देती है। पौधों की बढ़वार रूक जाती है तथा बालियों के स्थान पर टेड़ी मेड़ी गुच्छेनुमा हरी पत्तियॉ सी बन जाती है।

1.प्रभावित पौधों को निकालना और नष्ट करना।

2. थायरम या कैप्टान @ 3 ग्राम / किग्रा बीज के साथ बीजोपचार करें।

रोग प्रतिरोधी प्रजातियों का चयन किया जाय।

3.यमातो (कार्बेन्डाजिम 50 WP) या कार्बाक्सिन 1.00 किग्रा. मात्रा को 800-1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हे0 की दर से 8-10 दिन के अन्तराल पर 2-3 छिड़काव करना चाहिए या ज़ैनब @ 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में छिड़काव करें।

अरगट

 

संक्रमित फूलों से शहद ओस का स्राव निकलना, इससे मक्की और चींटियों का आकर्षित होते हैं । बाद में ये कठिन काठिन्य के रूप में बदल जाते है ।

 

  • केप्टन या थिराम @ 4  ग्राम प्रति किलो बीज की डॉ से बीजोपचार करें
  • 10 प्रतिशत आम नमक के घोल में बीज डुबोएं और तैर स्क्लेरोटिअ को हटा दें।
  • अकारी पत्ती और पुष्पन अवस्था पर ज़िरम@0.2% या यमातो (कार्बेन्डाजिम) @0.1% या सात्सुमा (मैंकोजेब) @0.2% के साथ स्प्रे करें।

रथुआ रोग

 

लक्षण पहले ज्यादातर निचली पत्तियों पर छोटे छोटे  पुस्तुलेस के रूप में दिखाई देते हैं, गोल लाल भूरे रंग के होते हैं।

पूरा पत्ता पूरी तरह से  एक झुलसा हुआ दिखाई देता है।

1.जंगली बैंगन जैसे खरपतवारों का नष्ट करना।

 2.वित्तबल सल्फर @ 3 ग्राम प्रति लीटर पानी  या सात्सुमा (मैंकोजेब) @ 2 ग्राम प्रति लीटर पानी  के साथ 15 दिनों के अंतराल पर तीन बार स्प्रे करें

रोपण के बाद 21 दिनों से शुरू

 प्रतिरोधी किस्में का चयन करें।

 

कीट नियंत्रण

कीट

लक्षण

नियंत्रण

तना छेदक

 

इस कीट की सूंड़ियां तने में छेद करके अन्दर ही अंदर खाती रहती हैं जिससे बीच का गोभ सूख जाता है।

 

इमिडाक्लोप्रिड (इसोजाशी) @ 7 मिली / किग्रा बीज के साथ बीजोपचार करें।

 

इसका नियंत्रण के लिए कार्बोफ्यूरान 3 जी 4 कि.ग्रा. प्रति एकड़ बुआई के 30 -45 दिन बाद पत्तों के गुच्छा में डालें अथवा अथवा डाईमेथोएट 30 EC 1.0 ली0 प्रति हे0 चिड़कव करें

 

प्ररोह मक्खी  

 

केंद्रीय अंकुरित सूख और "मृत हृदय" लक्षण पैदा करते हैं।

डिमेथोएटे 30 EC - 1.5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से चिड़ाव करें। 

 

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Umesh Thakor

16, Jul 2020 12:44:34PM

phorate to banned h

Vijay Kumar Kumar

09, Jul 2020 10:36:22AM

bajre me agri humic ki spray kitne din ki fasal par kare or not best hota hai ya urea phaspheat

हिमा शंकर के आर
(कृषि विशेषज्ञ)

16, Jul 2020 02:10:03PM

यूरिया फॉस्फेट - 5 -10 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव कर सकते हैं। बुआई के 20 -30 दिन की अवस्था में प्रयोग करें। 

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